पश्चिम बंगाल के सुंदरबन इलाके से प्रेम और साहस की एक अनोखी कहानी सामने आई है। यहां 19 साल की रिया सरदार और 20 साल की राखी नास्कर ने स्थानीय मंदिर में शादी की। दोनों ने समाज के पारंपरिक नियमों और समलैंगिक रिश्तों को लेकर बनी धारणाओं को चुनौती दी। हालांकि देखा जाए तो अभी भारत में समलैंगिक विवाह को कानून मान्यता नहीं मिली है।
रिया और राखी दोनों प्रोफेशनल डांसर हैं। करीब दो साल पहले दोनों की मुलाकात एक मंदिर में हुई थी। समय के साथ उनकी दोस्ती गहरी होती गई और यह रिश्ता प्रेम में बदल गया। राखी ने बताया, “हम दो साल से रिश्ते में हैं। हमारी पहली मुलाकात मंदिर में हुई थी। अब हम अपनी पूरी जिंदगी साथ बिताना चाहते हैं।”
रिया का परिवार नाखुश, राखी को मिला साथ
हालांकि, रिया के परिवार ने इस रिश्ते का विरोध किया, लेकिन राखी के परिवार और गांव के कुछ लोगों ने इन दोनों का साथ दिया। ग्रामीणों और दोस्तों की मदद से दोनों ने एक सरल लेकिन खुशियों से भरा विवाह समारोह आयोजित किया। स्थानीय मंदिर में हुई इस शादी में उन्होंने पारंपरिक तरीके से एक-दूसरे को मालाएं पहनाईं। गांव के लोगों ने तालियां बजाकर और खुशी जताकर उनके इस रिश्ते को स्वीकार किया।
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, विवाह आयोजन में मदद करने वाले एक ग्रामीण ने कहा, “हमने इस तरह की शादी पहले नहीं देखी, लेकिन वे एक-दूसरे से सच्चा प्रेम करते हैं, इसलिए हमने उनका साथ दिया।”
रिया बोली- प्यार ही सबसे अहम चीज है
रिया का जीवन बचपन से संघर्षों से भरा रहा है। बहुत छोटी उम्र में ही उसने अपने माता-पिता को खो दिया था। उसकी परवरिश उसकी चाची और चाचा ने की। कठिन परिस्थितियों के बावजूद रिया ने अपने दिल की बात सुनी और राखी के साथ अपना जीवन बिताने का निर्णय लिया। रिया ने कहा, “मुझे वह पसंद है, इसलिए हमने शादी कर ली। मैं जिंदगी भर उसके साथ रहूंगी। प्यार ही सबसे अहम चीज है।”
समलैंगिकता पर क्या कहता है कानून?
कानूनी रूप से भारत में समलैंगिक विवाह (same-sex marriage) को अभी मान्यता नहीं मिली है। अक्टूबर 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला दिया था कि समलैंगिक विवाह मौलिक अधिकार के दायरे में नहीं आता और विशेष विवाह अधिनियम (Special Marriage Act) ऐसे जोड़ों पर लागू नहीं होता।
इसके बावजूद, रिया और राखी जैसी जोड़ियाँ समाज में प्यार और स्वीकार्यता (acceptance) की नई मिसाल पेश कर रही हैं। यह घटना दिखाती है कि भारत में धीरे-धीरे ऐसे रिश्तों को लेकर सोच बदल रही है और लोग खुलेपन के साथ ऐसे प्रेम संबंधों को समझने लगे हैं।
सुंदरबन की यह कहानी सिर्फ एक शादी की नहीं, बल्कि उस हिम्मत की है जो समाज की सीमाओं से आगे जाकर अपने दिल की बात सुनने का साहस रखती है।







