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ममता का चुनाव आयोग और भाजपा पर वार; बोलीं- “BJP मुझे चोट पहुंचाएगी तो मैं पूरे देश में…

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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने बोनगांव में आयोजित एक रैली को संबोधित करते हुए चुनाव आयोग और बीजेपी पर जमकर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग अब निष्पक्ष संस्था नहीं रह गया है और “बीजेपी कमीशन” की तरह काम कर रहा है। SIR प्रक्रिया पर गंभीर आपत्ति जताते हुए ममता ने चेतावनी दी और कहा-

“अगर बीजेपी बंगाल में मुझे कमजोर करने की कोशिश करेगी, तो मैं पूरे भारत में उसकी नींव हिला दूंगी।”

SIR चुनाव से पहले मतदाता लूटने की कोशिश है

ममता ने कहा कि कुछ महीने पहले तक SIR शब्द से ज्यादातर लोग परिचित भी नहीं थे, लेकिन अब इसका इस्तेमाल ऐसे किया जा रहा है जैसे यह कोई विशेष अभियान हो। उन्होंने दावा किया कि SIR के नाम पर मतदाताओं को नोटिस भेजे जा रहे हैं, लोगों के नागरिकता दस्तावेज मांगे जा रहे हैं, और कई जगहों पर वैध मतदाताओं को भी ‘इनवैलिड’ बताया जा रहा है। उन्होंने कहा कि-

“जब SIR के बाद नई मतदाता सूची आएगी, तब लोगों को समझ आएगा कि बीजेपी और चुनाव आयोग ने किस तरह की आपदा खड़ी की है।”

उन्होंने कहा कि भाजपा जानती है कि वह बंगाल में राजनीतिक रूप से उनका मुकाबला नहीं कर सकती, इसलिए वह मतदाता सूची से “चुनिंदा लोगों को हटाकर खेल करना चाहती है।”

ममता ने कहा कि 2016, 2021 और 2024 में भी ऐसी ही कोशिशें की गईं लेकिन जनता ने बीजेपी की योजना को नाकाम किया।

अगर 2024 की वोटर लिस्ट इनवैलिड है तो प्रधानमंत्री का चुनाव भी इनवैलिड”

ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लेते हुए कहा—

“नरेंद्र मोदी 2024 की वोटर लिस्ट पर चुने गए थे। अगर अब वही लिस्ट इनवैलिड बताई जा रही है, तो फिर उनका चुनाव भी इनवैलिड होना चाहिए। क्या चुनाव आयोग इस पर कोई जवाब देगा?”

उन्होंने कहा कि बीजेपी वोटर लिस्ट में बदलाव को हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रही है क्योंकि वह जानती है कि जनता उन्हें अब विकास और रोज़गार के मुद्दों पर जवाब मांग रही है।

डरने की जरूरत नहीं, जब तक मैं हूं कोई नाम नहीं काट सकता

ममता ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि वह जीवन भर संघर्ष करती आई हैं और लोगों के अधिकारों के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।

उन्होंने कहा—

“नागरिकता के आधार पर जिन लोगों को इनवैलिड बताया जा रहा है, वो सब वैध दस्तावेज वाले लोग हैं। डरने की जरूरत नहीं है। जब तक मैं यहां हूं, कोई तुम्हें वोटर लिस्ट से हटा नहीं सकता।”

सिंगूर आंदोलन का जिक्र करते हुए ममता ने कहा कि उनकी लड़ाई का इतिहास दूसरों से अलग है।

“मैंने 26 दिन का अनशन किया, हेलीकॉप्टर रोक दिया जाए तो भी मैं पैदल निकलकर लोगों तक पहुंच जाऊंगी। मेरे रास्ते में रुकावट डालकर कोई मुझे राजनीति से बाहर नहीं कर सकता।”

बिहार चुनाव भी SIR का ही परिणाम है 

ममता ने यह दावा कर राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी कि हालिया बिहार चुनाव का नतीजा भी SIR प्रक्रिया से जुड़ा हुआ था। उनके अनुसार,

“विपक्ष ने बीजेपी की चाल वहां समझी नहीं, इसलिए नतीजे बदले हुए दिखाई दिए।”

उन्होंने कहा कि SIR कोई बुरी प्रक्रिया नहीं है, लेकिन इसे चुनाव से एक-दो महीने पहले लागू करना उचित नहीं।

“अगर SIR दो-तीन साल के अंतराल में किया जाए और पूरा सिस्टम अपडेट किया जाए, तो हम संसाधनों के साथ इसका समर्थन करेंगे।”

चुनाव आयोग को भेजा पत्र

ममता ने रैली में अपने उस पत्र का भी जिक्र किया जिसे उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भेजा है। पत्र में उन्होंने चुनाव आयोग के दो नए निर्देशों पर सवाल उठाए हैं और कहा है कि यह “संदेह पैदा करता है कि क्या ये फैसले किसी एक राजनीतिक दल की मदद के लिए उठाए जा रहे हैं।”

उन्होंने पत्र की कॉपी अपने एक्स अकाउंट पर साझा कर कहा था कि वह खुद भी इन निर्देशों से हैरान हैं।

SIR राष्ट्रीय प्रक्रिया है, ममता अपने राजनीतिक किले के खिसकने से घबराई हैं : बीजेपी

ममता बनर्जी के आरोपों पर बीजेपी ने तुरंत पलटवार किया। पश्चिम बंगाल बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कहा—

“SIR पूरे देश में चल रही राष्ट्रीय प्रक्रिया है। 12 राज्यों में लागू है। फिर बंगाल में ही इतना विरोध क्यों? क्योंकि ममता पुरानी मतदाता सूची के आधार पर चुनाव चाहती हैं।”

भट्टाचार्य ने यह दावा भी किया कि हालिया जांच में एक महिला का नाम बंगाल में आठ अलग-अलग जगहों पर दर्ज मिला, जो दर्शाता है कि पुरानी सूची में भारी अनियमितताएं हैं।

बीजेपी ने कहा कि तृणमूल ऐसी सूची चाहती है जिससे उसे चुनावी लाभ मिले, इसलिए वह सुधार प्रक्रिया को रोकना चाहती है।

भारतीय राजनीति का नया फ्लैशपॉइंट बन सकता है SIR

बंगाल में राजनीतिक तनाव पहले से ही चरम पर है। SIR प्रक्रिया पर तृणमूल और बीजेपी खुलकर आमने-सामने आ गए हैं। आने वाले महीनों में यह मुद्दा 2026 विधानसभा चुनाव का प्रमुख विषय बन सकता है।

एक ओर ममता बनर्जी इसको “जन-अधिकारों पर हमला” बता रही हैं, वहीं बीजेपी इसे “सुधार का राष्ट्रीय अभियान” कह रही है। लेकिन इतना तय है कि इस संघर्ष की गूंज सिर्फ बंगाल तक सीमित नहीं रहेगी

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