“परिवारवादी राजनीति परिवार की भलाई के लिए होती है, उसको देश की भलाई से कोई लेना-देना नहीं होता है।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 75वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से दिए अपने भाषण में परिवारवाद पर जमकर निशाना साधा था। अब NDA के घटक दल राष्ट्रीय लोक मोर्चा पार्टी (RLM) के प्रमुख और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाह पर वंशवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए उनकी पार्टी के 7 नेताओं ने अपने पद से इस्तीफे दे दिए हैं। ये इस्तीफे उपेंद्र कुशवाह के बेटे दीपक प्रकाश को बिहार की नीतीश सरकार में मंत्री (पंचायती राज विभाग) बनाए जाने के बाद सामने आए हैं।
वंशवाद का आरोप यूं ही नहीं लगा
RLM और उपेंद्र कुशवाहा पर वंशवाद का आरोप यूं ही नहीं लगा है। इसके पीछे की वजह है- दीपक प्रकाश ने बिहार विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ा था और न ही किसी सदन के सदस्य हैं। (विधानसभा और विधान परिषद) वंशवाद के आरोप की सबसे बड़ी वजह है- ‘उपेंद्र कुशवाह द्वारा अपनी पत्नी स्नेहलता कुशवाहा समेत पार्टी द्वारा जीते गए अन्य विधायकों की जगह बेटे को मंत्री बनाना।’ इस चुनाव में RLM ने एनडीए में रहकर 6 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे और 4 ने जीत दर्ज की थी।
“अब साथ काम करना संभव नहीं”-RLM उपाध्यक्ष
RLM के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जीतेंद्र नाथ ने अपने इस्तीफा में उपेंद्र कुशवाहा से कहा-
“मैं बीते 9 साल से आपके साथ काम कर रहा हूं, लेकिन अब कोई राजनीतिक एवं सांगठनिक निर्णय से खुद को जोड़ नहीं पा रहा हूं। ऐसी स्थिति में अब साथ काम करना संभव नहीं है। इसलिए पद और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देना ही उचित है।”

RLM के इन 7 नेताओं ने दिया इस्तीफा
RLM की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने वाले नेताओं के नाम हैं- राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जितेंद्र नाथ, प्रदेश प्रवक्ता राहुल कुमार, राज्य पार्टी महासचिव और प्रवक्ता राहुल कुमार, राज्य महासचिव एवं नालंदा ज़िला प्रभारी राजेश रंजन सिंह, राज्य महासचिव और जमुई जिला प्रभारी बिपिन कुमार चौरसिया, राज्य महासचिव एवं लखीसराय ज़िला प्रभारी प्रमोद यादव और शेखपुरा जिला अध्यक्ष पप्पू मंडल।
बेटे को मंत्री बनाने को बताया विवशता
उपेंद्र कुशवाहा ने बेटे को मंत्री बनाए जाने के फैसले को विवशता करार देते हुए जहर पीने के समान बताते हुए लिखा-
“जरा समझिए मेरी विवशता को। पार्टी के अस्तित्व व भविष्य को बचाने व बनाए रखने के लिए मेरा यह कदम जरूरी ही नहीं अपरिहार्य था।”
अपने परिवार को तरजीह और वंशवाद का जाल
एक तरफ उपेंद्र कुशवाहा इसे विवशता करार दे रहे हैं, तो दूसरी तरफ उनके इस निर्णय को पूरी तरह वंशवाद से प्रेरित बताया जा रहा है। बिहार राज्य पार्टी के अध्यक्ष महेंद्र कुशवाहा ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा-
“उपेंद्र कुशवाहा अक्सर राजनीति में नैतिक मूल्यों की बातें करते हैं लेकिन जब मौक़ा आया, तो उन्होंने सत्ता के लिए अपने परिवार को तरजीह दी.” वहीं राहुल कुमार ने कहा- “श्री कुशवाहा वंशवाद के जाल में फंस गए हैं।”
परिवारवाद के आरोप को बताया जहर पीने जैसा
उपेंद्र कुशवाहा ने आगे लिखा-
“समुद्र मंथन से अमृत और ज़हर दोनों निकलता है। कुछ लोगों को तो ज़हर पीना ही पड़ता है। वर्तमान के निर्णय से परिवारवाद का आरोप मेरे उपर लगेगा। यह जानते/समझते हुए भी निर्णय लेना पड़ा, जो मेरे लिए ज़हर पीने के बराबर था।”
बेटे की तरफदारी करते दिखे कुशवाहा
उपेंद्र कुशवाह ने अपने फैसले को जायज ठहराने के बाद बेटे की तरफदारी करते हुए लिखा-
“दीपक विद्यालय की कक्षा में फेल विद्यार्थी नहीं है। मेहनत से पढ़ाई करके कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग की डिग्री ली है, पूर्वजों से संस्कार पाया है। थोड़ा वक्त दीजिए। अपने को साबित करने का।”

नीतीश के उदाहरण से सीखें नेता
एक तरफ कुशवाहा ने अपने बेटे के बचाव में इतने तर्क दे डाले, वहीं दूसरी तरफ नीतीश कुमार के बेटे निशांत अपने पिता के 10वें शपथ ग्रहण समारोह में सामान्य व्यक्ति की तरह दर्शक दीर्घा में बैठे दिखे, न कि उपेंद्र कुशवाहा के बेटे की तरह बिना चुनाव लड़े और बिना सदन की सदस्यता के मंत्री बनते हुए। इस मामले में नीतीश कुमार की छवि हमेशा से साफ सुथरी रही है। लोग उनको उदाहरण की तरह पेश कर रहे हैं।
वंशवाद के हमलों पर नरेंद्र मोदी पर उठ रहे सवाल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद वंशवाद की राजनीति को लेकर कांग्रेस और अन्य क्षेत्रीय पार्टियों पर हमलावर रहते हैं। 75वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से दिए भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परिवारवाद पर जोरदार हमला करते हुए कहा था-
“परिवारवाद की वजह से देश में योग्यता की कद्र नहीं हो पा रही है। इसने सबसे ज्यादा नुकसान राजनीति का किया है। परिवारवादी राजनीति परिवार की भलाई के लिए होती है, उसको देश की भलाई से कोई लेना-देना नहीं होता है।”
विपक्षी दल नरेंद्र मोदी पर निशाना साध रहे हैं कि उन्हें अपने घटक दल (RLM) के इस निर्णय पर भी ध्यान देना चाहिए।







