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विपक्ष के हमलों के बीच उपेन्द्र कुशवाहा का नीतीश कुमार वाला ‘पुराना गुरुमंत्र’ फिर चर्चा में

by Rani
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बिहार की राजनीति इस समय परिवारवाद के सवाल पर तेज़ी से सुलग रही है। विपक्ष लगातार एनडीए सरकार पर निशाना साध रहा है और विशेष रूप से पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को घेर रहा है। विपक्ष का कहना है कि न वे विधायक हैं और न ही विधान पार्षद, इसके बावजूद उन्हें मंत्री बनाया जाना स्पष्ट रूप से परिवारवाद और राजनीतिक पक्षधरता का मामला है।

इसी विवाद के बीच, केंद्र में आए उपेन्द्र कुशवाहा के बेटे और मंत्री दीपक प्रकाश को लेकर उपेन्द्र कुशवाहा ने विपक्ष को अपने अंदाज़ में जवाब दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पुरानी टिप्पणी साझा करते हुए विरोधियों पर तंज कसते हुए साफ संदेश दिया कि सरकार पर लगाए जा रहे आरोप बेबुनियाद हैं।

कुशवाहा का जवाब- एक पुरानी सीख और नया राजनीतिक संदेश

विपक्ष के लगातार हो रहे हमलों के बीच उपेन्द्र कुशवाहा ने सोशल मीडिया पर सीएम नीतीश कुमार की एक पुरानी बात याद दिलाई, जो तुरंत ही राजनीतिक विमर्श के केंद्र में आ गई। उन्होंने लिखा है कि-

“कभी-कभी बड़ों की कही बातों को याद करना चाहिए। आज न जाने क्यों बड़े भाई नीतीश कुमार जी की एक पुरानी बात याद आ गई।”

इसके साथ उन्होंने नीतीश कुमार का बयान उद्धृत किया-

“खाना खाते वक्त मक्खियां भन-भनाएंगी। चिंता मत कीजिए। बाएं हाथ से भगाते रहिए, दाहिने से खाते रहिए।”

इस बयान को राजनीतिक गलियारों में विपक्ष के लिए सीधा संदेश माना गया है। जिसका अर्थ यह निकाला जा रहा है कि सरकार अपना काम करती रहेगी और आलोचनाओं को ‘मक्खियों’ की तरह देखा जाना चाहिए—जिन्हें बस हटाते रहना है, रुकना नहीं है।

विपक्ष इसे नैतिकता का मुद्दा बताने में लगा है

विपक्षी दल इस विवाद को सिर्फ नियुक्ति का मामला नहीं मान रहे। उनके अनुसार, यह पूरी सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने का बड़ा मौका है। वे इसे ‘नैतिकता बनाम सत्ता’ के रूप में जनता के सामने पेश करना चाहते हैं।

विपक्ष का दावा है कि जिस व्यक्ति के पास विधानमंडल की सदस्यता तक नहीं है, उसे मंत्री बनाना सत्ता का दुरुपयोग है और यह दिखाता है कि एनडीए सरकार में “पारिवारिक रिश्ते योग्यता से बड़े हैं।”

कुछ विपक्षी नेताओं ने यह भी पूछा कि क्या बिहार में योग्य और अनुभवी नेताओं की इतनी कमी है कि बाहर से मंत्री ढूंढने पड़ रहे हैं?

एनडीए इसे बता रहा है बेबुनियाद विवाद 

इसके उलट एनडीए पूरी तरह रक्षात्मक होने के बजाय आक्रामक रुख में है। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह विवाद ‘बिना तथ्य वाला राजनीतिक शोर’ है, जिसे करारी हार के बाद जबरन तूल दिया जा रहा है।

उपेन्द्र कुशवाहा खुद भी स्पष्ट शब्दों में संकेत दे चुके हैं कि सरकार विपक्ष के दबाव में आने वाली नहीं है और आलोचनाएं विकास के कामों को नहीं रोक सकतीं।

दीपक प्रकाश की नियुक्ति पर छिड़ी यह बहस धीमी पड़ने के आसार अभी दिखाई नहीं दे रहे। विपक्ष इसे बड़े मुद्दे की तरह पेश कर रहा है, वहीं एनडीए इसी ऊर्जा से इसे खारिज भी कर रहा है।

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