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बिलासपुर ट्रेन हादसा: जांच में सामने आई बड़ी लापरवाही, इस गलती से गई 11 लोगों की जान

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छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में हुए भीषण ट्रेन हादसे में 11 लोगों की मौत के बाद प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, हादसे की मुख्य वजह यात्री ट्रेन के चालक दल (क्रू) की लापरवाही रही। उन्होंने रेड सिग्नल पर ट्रेन को कंट्रोल नहीं किया, जिसके कारण ट्रेन खड़ी मालगाड़ी से जा टकराई।

यह दर्दनाक हादसा मंगलवार शाम करीब 4 बजे हुआ, जब बिलासपुर जिले के पास चल रही एक स्थानीय MEMU (Mainline Electric Multiple Unit) पैसेंजर ट्रेन ने खड़ी मालगाड़ी को पीछे से टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि पैसेंजर ट्रेन का एक कोच मालगाड़ी के डिब्बे के ऊपर चढ़ गया। हादसे में 11 लोगों की मौत हो गई, जिनमें ट्रेन का लोको पायलट भी शामिल था।

घटना के तुरंत बाद रेलवे प्रशासन ने पांच विशेषज्ञों की एक टीम से प्राथमिक जांच कराई। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि MEMU ट्रेन (नंबर 68733) के चालक दल ने चेतावनी सिग्नल को नजरअंदाज किया और ट्रेन को समय पर नहीं रोका। इस वजह से ट्रेन ने लाल सिग्नल पार कर दिया। इसे तकनीकी भाषा में SPAD (Signal Passed at Danger) कहा जाता है।

रिपोर्ट में क्या कहा गया?
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक प्रारंभिक जांच में कहा गया है, “MEMU ट्रेन नंबर 68733 के चालक दल ने खतरे के सिग्नल AJ-5 पर ट्रेन को नियंत्रित करने में विफलता दिखाई और आगे खड़ी मालगाड़ी (नंबर N/MDIT) के अंतिम ब्रेक वैन से टकरा गए।”

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि यह टक्कर उस समय हुई जब ट्रेन ने लाल सिग्नल को पार किया और सीधे मालगाड़ी के पिछले डिब्बे से टकराई। हादसे के वक्त मालगाड़ी में कुल 59 वैगन थे और वह स्टेशन पर सिग्नल का इंतजार कर रही थी।

जांच के अनुसार, MEMU ट्रेन ने मंगलवार दोपहर 3:48 बजे गेवरा स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 2 से बिलासपुर की ओर प्रस्थान किया था। कुछ ही मिनट बाद यानी करीब 3:50 बजे ट्रेन ने रेड सिग्नल पार किया और आगे खड़ी मालगाड़ी से जा भिड़ी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि मालगाड़ी का ब्रेक वैन पूरी तरह पलट गया और पैसेंजर ट्रेन का इंजन उसके ऊपर चढ़ गया।

लोको पायलट की मौत, असिस्टेंट घायल
टक्कर के बाद दोनों ट्रेनों के कई डिब्बे क्षतिग्रस्त हो गए। स्थानीय लोगों और रेलवे कर्मियों ने मिलकर राहत और बचाव कार्य शुरू किया। गंभीर रूप से घायल लोको पायलट को अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। वहीं, असिस्टेंट लोको पायलट गंभीर रूप से घायल मिलीं और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।

जांच टीम ने बताया कि असिस्टेंट लोको पायलट की हालत खराब होने के कारण ब्रिथ एनालिसिस टेस्ट (शराब सेवन जांच) नहीं किया जा सका। अधिकारियों ने कहा कि अभी यह जांच का विषय है कि हादसे के वक्त चालक दल पूरी तरह सतर्क था या नहीं।

आगे क्या होगा?
रेलवे प्रशासन ने हादसे के तुरंत बाद विस्तृत जांच के आदेश दे दिए हैं। कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी अब पूरे मामले की जांच करेंगे और तकनीकी व मानवीय गलती के सभी पहलुओं की रिपोर्ट तैयार करेंगे।

रेल मंत्रालय ने मृतकों के परिजनों के लिए ₹5 लाख मुआवजे का ऐलान किया है। कांग्रेस ने इस हादसे पर नाराजगी जताते हुए उच्चस्तरीय जांच और मृतकों के परिवारों को ₹1 करोड़ मुआवजा देने की मांग की है।

बिलासपुर का यह हादसा एक बार फिर रेलवे सुरक्षा पर सवाल खड़े करता है। प्रारंभिक रिपोर्ट भले ही चालक दल की गलती की ओर इशारा करती हो, लेकिन यह भी साफ है कि रेलवे सिस्टम में तकनीकी खामियां और सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरियां भी ऐसे हादसों को बढ़ावा दे रही हैं।

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