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धरती के सबसे करीब आया चांद, जानिए ‘Supermoon’ के पीछे का विज्ञान

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Science behind the supermoon: नवंबर का आसमान एक बार फिर चमक उठा है। वजह है, सुपरमून (Supermoon)। यह एक अद्भुत खगोलीय नजारा है। पूर्णिमा की रात, जब चांद अपनी अंडाकार कक्षा (elliptical orbit) में धरती के सबसे नजदीकी बिंदु ‘पेरिजी’ (Perigee) पर होता है, तो उसे सुपरमून कहा जाता है।

इस समय चांद आम दिनों की तुलना में करीब 14 फीसदी बड़ा और 30 फीसदी ज्यादा चमकीला दिखाई देता है। यही वजह है कि जब आसमान में सुपरमून दिखता है, तो लोगों का दिल चुरा लेता है। दुनिया भर में लोग इस दुर्लभ नजारे को देखने के लिए बेसब्री से इंतजार करते हैं।

सुपरमून कैसे बनता है?

दरअसल, चांद की कक्षा एकदम गोल नहीं, बल्कि अंडाकार होती है। इस वजह से चांद कभी धरती के करीब और कभी उससे दूर चला जाता है। जब यह लगभग 3,60,000 किलोमीटर की दूरी पर आता है, तो इसे ‘पेरिजी’ कहा जाता है। वहीं, जब यह लगभग 4,00,000 किलोमीटर दूर चला जाता है, तो वह बिंदु ‘एपोजी’ (Apogee) कहलाता है। जब पूर्णिमा का दिन चांद के पेरिजी पर होने के साथ मेल खाता है, तो वह सामान्य से ज्यादा बड़ा और चमकीला दिखता है। यही सुपरमून होता है।

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‘सुपरमून’ शब्द की कहां से आया है?

‘सुपरमून’ शब्द पहली बार 1979 में ज्योतिषी रिचर्ड नॉले (Richard Nolle) ने गढ़ा था। हालांकि शुरुआत में इसे ज्योतिषीय शब्द माना गया, लेकिन आज इसे खगोलशास्त्रियों (astronomers) ने भी वैज्ञानिक रूप से स्वीकार कर लिया है। वैज्ञानिक रूप से इस घटना को “पेरिजी-सिजी मून” (Perigee-Syzygy Moon) कहा जाता है। इसका सरल सा मतलब है- जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीधी रेखा में आ जाते हैं और चंद्रमा अपने सबसे नजदीकी बिंदु पर होता है।

क्यों होता है ज्यादा चमकीला?

सुपरमून के दौरान सूर्य की किरणें चंद्रमा की सतह से अधिक परावर्तित (टकराकर वापस लौटना) होती हैं। इस कारण चांद का डिस्क सामान्य से ज्यादा उजला और चमकीला दिखता है। साफ मौसम में इसे नंगी आंखों से भी आसानी से देखा जा सकता है। यह रात के आसमान में सबसे प्रमुख खगोलीय पिंड बन जाता है।

धरती पर इसका असर

आपको एक और अमेजिंग फैक्ट बताते हैं। सुपरमून के दौरान केवल सुंदर नजारा ही नहीं देखने को मिलता है, बल्कि यह धरती के ज्वार-भाटा (tides) पर भी असर डालता है। जब चांद धरती के करीब होता है, तो उसका गुरुत्वाकर्षण बल बढ़ जाता है, जिससे समुद्रों में उच्च ज्वार (higher high tides) और निम्न भाटा (lower low tides) आते हैं। हालांकि, यह असर हर जगह एक जैसा नहीं होता है। यह स्थानीय भौगोलिक स्थिति और चांद के चक्र पर निर्भर करता है।

इस नवंबर का अद्भुत नज़ारा

इस नवंबर का सुपरमून साल का सबसे नजदीकी पूर्ण चांद होगा। यह आसमान को चांदी की रोशनी से नहला देगा और खगोल विज्ञान के शौकीनों के लिए एक यादगार पल बनेगा। तो इस नवंबर, जब आसमान में चमकता हुआ बड़ा चांद दिखे, आप एक बार नजर भरकर जरूर देखें। यह सिर्फ एक चांद नहीं, बल्कि धरती और ब्रह्मांड के बीच की जीवंत कड़ी है, जो हमें हर बार विस्मय से भर देती है।

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