मुँगेर विधानसभा सीट पर मतदान से ठीक एक दिन पहले जन सुराज पार्टी को बड़ा झटका लगा है। पार्टी के उम्मीदवार संजय कुमार सिंह ने बुधवार को पार्टी से इस्तीफा देकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का दामन थाम लिया। उन्होंने ऐलान किया कि वे अपने प्रतिद्वंदी और बीजेपी उम्मीदवार कुमार प्रणय के समर्थन में काम करेंगे।
इस कदम के साथ जन सुराज के चार उम्मीदवार अब मैदान से बाहर हो चुके हैं। इससे पहले दानापुर, ब्रह्मपुर और गोपालगंज सीटों से भी जन सुराज के प्रत्याशी या तो नामांकन वापस ले चुके हैं या चुनावी दौड़ से खुद को अलग कर चुके हैं।
52 वर्षीय संजय कुमार सिंह ने कहा कि उन्होंने यह फैसला “विकास और स्थिर सरकार के हित में” लिया है। उन्होंने कहा, “मैंने एनडीए उम्मीदवार का पूर्ण समर्थन करने का निर्णय लिया है और उनकी बड़ी जीत सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करूंगा।”
बीजेपी उम्मीदवार कुमार प्रणय ने संजय सिंह का स्वागत करते हुए उन्हें “बड़े भाई” की तरह बताया। प्रणय ने कहा, “संजय कुमार सिंह जनता की आवाज़ का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनका समर्थन मुँगेर में विकास और स्थिरता के हमारे संकल्प को और मजबूत करेगा।”
जिला बीजेपी पदाधिकारियों ने भी संजय सिंह के पार्टी में आने का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि सिंह “पार्टी की विकास दृष्टि में विश्वास रखने वाले नेता” हैं, जिन्होंने “अपने निजी राजनीतिक स्वार्थों से ऊपर उठकर यह निर्णय लिया है।”
संजय कुमार सिंह, जो कि धनुक (EBC) समुदाय से आते हैं और जिला परिषद सदस्य हैं। उनके बाहर होने से अब मुँगेर की लड़ाई सीधी हो गई है। अब ये लड़ाई बीजेपी के कुमार प्रणय और आरजेडी के उम्मीदवार अविनाश कुमार विद्यार्थी के बीच है।
मुँगेर विधानसभा सीट हमेशा से अप्रत्याशित रही है। यहां कभी जनता दल, कभी आरजेडी तो कभी जेडीयू ने जीत हासिल की है। साल 2020 में यह सीट बीजेपी के खाते में गई थी। यहां जातीय समीकरणों का गहरा प्रभाव है। यहां यादव, मुस्लिम, वैश्य और सवर्ण समुदाय मिलकर वोट ही समीकरण तय करते हैं।
बीजेपी ने इस बार जोखिम उठाते हुए अपने मौजूदा विधायक प्रणव कुमार यादव की जगह कुमार प्रणय को टिकट दिया है। हालांकि जन सुराज की जीत की संभावना कम थी, लेकिन संजय सिंह के प्रभाव और उनके समुदाय के वोटों के बंटवारे से बीजेपी को नुकसान हो सकता था। अब उनके पार्टी में शामिल होने से धनुक वोटर पूरी तरह बीजेपी के साथ आ सकते हैं, जो निर्णायक साबित हो सकता है।
आरजेडी उम्मीदवार अविनाश कुमार विद्यार्थी, जो यादव समुदाय से हैं, ने 2020 के चुनाव में बीजेपी के प्रणव कुमार यादव से मात्र 1,244 वोटों से हार का सामना किया था।
उधर, जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने अपने उम्मीदवारों के पीछे हटने पर बीजेपी पर तीखा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पार्टी के प्रत्याशियों को डराया-धमकाया गया, और इसके लिए उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के नाम भी लिए। किशोर ने कहा कि यह इस बात का संकेत है कि बीजेपी “जन सुराज के पेशेवर और ईमानदार उम्मीदवारों से डर रही है।







