---Advertisement---

बाइक चुराने वाला कैसे बना यूपी का कुख्यात सुपारी किलर? गैंगस्टर भानु प्रताप की पूरी कहानी

भानु प्रताप
---Advertisement---

साल था 2011। उत्तर प्रदेश में एक शख्स पहली बार पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज हुआ। आरोप था बाइक चोरी का। उस समय शायद ही किसी ने नहीं सोचा होगा कि यही शख्स आने वाले सालों में प्रदेश के सबसे कुख्यात शूटरों और कथित सुपारी किलरों में शामिल हो जाएगा। पुलिस रिकॉर्ड खंगालने पर मालूम होता है कि भानु प्रताप सिंह की अपराध की दुनिया में एंट्री यहीं से हुई और फिर वह लगातार अपराध की सीढ़ियां चढ़ता चला गया।

उत्तर प्रदेश पुलिस के अनुसार, 38 वर्षीय भानु प्रताप सिंह का अंत जून 2026 में एक पुलिस मुठभेड़ में हुआ। लेकिन उसकी कहानी सिर्फ एक अपराधी के मारे जाने की नहीं, बल्कि एक ऐसे शख्स की है जिसने छोटी-मोटी चोरी से शुरुआत की और धीरे-धीरे हत्या, लूट और सुपारी किलिंग जैसे गंभीर अपराधों तक पहुंच गया।

2011 में शुरू हुई अपराध की दुनिया

एनडीटीवी की रिपोर्ट में पुलिस अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि भानु प्रताप किसी बड़े आपराधिक परिवार से नहीं था। उसके पिता किसान थे और परिवार का सामान्य जीवन था। लेकिन शुरुआती सालों में चोरी और लूट की घटनाओं में उसका नाम सामने आने लगा। 2011 में पहला चोरी का केस दर्ज हुआ। इसके बाद 2013 में एक और चोरी के मामले में वह पुलिस के शिकंजे में आया।

साल 2013 में दर्ज हुआ हत्या का पहला केस

हालांकि, उसी साल उसकी आपराधिक दुनिया ने नया मोड़ लिया। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, 2013 में गोरखपुर के बेलघाट इलाके में उसके खिलाफ पहला हत्या का मामला दर्ज हुआ। इसके बाद भानु प्रताप का अपराध लगातार गंभीर होता गया। वह कई बार गिरफ्तार हुआ, जेल गया, जमानत पर बाहर आया, लेकिन अपराध की दुनिया से उसका रिश्ता नहीं टूटा।

2016-18 में गैंगस्टर एक्ट के तहत एक्शन

वर्ष 2016 और 2018 में उसके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई हुई। इसके बावजूद वह लूट, रंगदारी और हत्या जैसे मामलों में कथित रूप से सक्रिय रहा। पुलिस का कहना है कि समय के साथ उसने समझ लिया कि चोरी और लूट की तुलना में सुपारी लेकर हत्या करना ज्यादा कमाई वाला धंधा है। यहीं से वह कथित तौर पर एक पेशेवर शूटर बन गया।

पैसे लेकर कराने लगा हत्याएं

जांच एजेंसियों के अनुसार, भानु प्रताप पैसे लेकर हत्याएं करता था। जैसे-जैसे उसका नाम अपराध जगत में फैलता गया, वैसे-वैसे उसकी मांग भी बढ़ती गई। पुलिस रिकॉर्ड में उसके खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, आपराधिक साजिश, धमकी, धोखाधड़ी, आर्म्स एक्ट और एनडीपीएस एक्ट समेत 41 से अधिक मामले दर्ज बताए गए हैं।

2023 तक बन चुका था पेशेवर अपराधी

साल 2023 के बाद भानु प्रताप का आत्मविश्वास और बढ़ गया। पुलिस का दावा है कि वह लगातार ठिकाने बदलता था और तीन साल तक एजेंसियों की पकड़ से दूर रहा। वह अक्सर गोरखपुर और महाराजगंज के बीच अपने ठिकाने बदलता रहता था। पुलिस के अनुसार, वह मोबाइल फोन का इस्तेमाल भी बेहद सावधानी से करता था ताकि कोई डिजिटल सबूत न छोड़े।

2025 में कराई दूध कारोबारी की हत्या

अक्टूबर 2025 में दूध कारोबारी पती राज यादव की हत्या के मामले ने उसे फिर सुर्खियों में ला दिया। जांचकर्ताओं का दावा है कि यह हत्या करीब चार लाख रुपये की सुपारी पर की गई थी, जिसमें उसे डेढ़ लाख रुपये एडवांस मिले थे। पुलिस का आरोप है कि उसने पूरी योजना के साथ वारदात को अंजाम दिया और मौके से फरार हो गया।

कुल 1.65 लाख के इनाम घोषित किए गए

भानु प्रताप की गिरफ्तारी के लिए कई जिलों की पुलिस ने इनाम घोषित कर रखा था। आजमगढ़ पुलिस ने उस पर एक लाख रुपये, अंबेडकर नगर पुलिस ने 50 हजार रुपये और गोरखपुर पुलिस ने 15 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। अलग-अलग जिलों के इनाम जोड़ने पर उसके सिर पर कुल 1.65 लाख रुपये का इनाम था।

जून 2026 में मुठभेड़ में मार गिराया गया

आखिरकार जून 2026 में उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टीम के साथ हुई मुठभेड़ में भानु प्रताप सिंह मारा गया। पुलिस के मुताबिक, उसके साथ ही दो दशक से ज्यादा समय तक फैली एक लंबी आपराधिक कहानी का भी अंत हो गया। लेकिन उसकी कहानी यह भी दिखाती है कि कैसे एक बाइक चोरी का आरोपी धीरे-धीरे प्रदेश के सबसे वांछित कथित सुपारी किलरों में बदल गया।

Join WhatsApp

Join Now

---Advertisement---

Leave a Comment